* *नदी और मसली की विस्तृत कहानी** एक घने जंगल के किनारे विशाल नदी बहती थी, जिसका पानी नीला और स्वच्छ था। नदी के एक तरफ हरे-भरे पेड़ों के बीच मसलियों की एक बस्ती थी, जहाँ छोटी-छोटी मसलियाँ मिलजुल कर रहती थीं। उनमें से एक मसली बहुत ही बुद्धिमान और साहसी थी, जिसका नाम नीरा था। ### **नीरा की इच्छा** एक दिन नीरा नदी किनारे भोजन की तलाश में घूम रही थी कि तभी उसकी नज़र नदी के दूसरे किनारे पर पड़ी। वहाँ उसने ढेर सारे स्वादिष्ट फल, रसीले बीज और फूल देखे। उसका मन ललचा गया, लेकिन नदी इतनी चौड़ी और गहरी थी कि उसे पार करना आसान नहीं था। नीरा ने सोचा, *"अगर मैं इस नदी को पार कर लूँ, तो मैं अपने पूरे परिवार के लिए भरपूर भोजन ला सकती हूँ।"* लेकिन समस्या यह थी कि मसलियाँ तैर नहीं सकती थीं, और नदी का बहाव भी तेज़ था। ### **समस्या का समाधान ढूँढना** नीरा ने अपने दोस्तों से मदद माँगी, लेकिन सभी ने कहा, *"यह असंभव है! हम इतनी बड़ी नदी कैसे पार करेंगे?"* पर नीरा हार मानने वाली नहीं थी। वह नदी किनारे बैठकर सोचने लगी। तभी...
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Showing posts from June, 2025
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सुमन और उसके संघर्ष की कहानी सुमन का बचपन गरीबी की छाया में बीता। उसके पिता रामू, एक छोटे से खेत में मजदूरी करते, और माँ सीता बिस्तर पर पड़ी रहतीं। कभी-कभी तो सुमन और उसका छोटा भाई राहुल पूरा दिन चाय-रोटी पर गुज़ार लेते। फिर भी, सुमन कभी निराश नहीं हुई। वह सुबह चार बजे उठकर घर के काम करती, फिर स्कूल जाती। एक बार जब स्कूल की फीस भरने के पैसे नहीं थे, तो प्रिंसिपल ने उसे क्लास से बाहर निकाल दिया। सुमन ने रोते हुए कहा, *"सर, मैं पढ़कर कुछ बनना चाहती हूँ!"* उसकी आँखों में दृढ़ता देखकर एक शिक्षिका ने उसकी फीस भर दी। --- सुमन की एक ही दोस्त थी— नीतू, जो उसी गाँव की थी। नीतू के पिता दुकानदार थे, इसलिए वह सुमन की मदद करती। कभी किताबें देती, तो कभी अपना टिफिन बाँट लेती। एक दिन, नीतू ने सुमन को बताया कि शहर में *"मेधावी छात्र छात्रवृत्ति योजना"* के लिए आवेदन आए हैं। सुमन ने उसे भरा और पूरी रात पढ़कर परीक्षा दी। जब परिणाम आया, तो पूरा गाँव हैरान रह गया— सुमन ने जिले में प्रथम स्थान पाया था! उसे हर महीने 500 रुपये की छात्रवृत...
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**कहानी का नाम: "अनबोले इश्क के रंग"** राजस्थान के एक छोटे से गाँव में रहने वाली **मीरा** एक साधारण लेकिन खुशमिज़ाज लड़की थी। उसके पिता किसान थे, और माँ घर संभालती थी। मीरा को गीत-संगीत और प्रकृति से गहरा लगाव था। वह अक्सर सुबह-सुबह गाँव के बाहर स्थित झील के किनारे बैठकर गीत गुनगुनाया करती थी। एक दिन, जब मीरा अपनी सहेलियों के साथ झील पर मछलियाँ देख रही थी, तभी उसकी नज़र एक नौजवान पर पड़ी। वह **अर्जुन** था—एक शहर से आया हुआ युवक, जो अपने चाचा के यहाँ छुट्टियाँ बिताने आया था। अर्जुन को पेंटिंग का शौक था, और वह झील के किनारे प्राकृतिक दृश्यों को कैनवस पर उतार रहा था। मीरा और अर्जुन की पहली मुलाकात में ही एक अजीब सी चिंगारी दौड़ गई। दोनों को लगा कि वे पहले भी कहीं मिल चुके हैं। धीरे-धीरे, वे रोज़ झील पर मिलने लगे। मीरा गीत सुनाती, अर्जुन पेंटिंग बनाता। उनके बीच बिना कहे ही एक गहरी समझ विकसित हो गई। लेकिन समय बीतने के साथ ही अर्जुन के लौटने का दिन नज़दीक आ गया। वह जानता था कि उसके माता-पिता उसकी शादी किसी खास परिवार में तय कर चुके हैं। एक...
सब्जी वाला
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एक दिन, जब रोहित सुबह सब्ज़ी लेने पहुँचा, तो देखा कि रामू काका की दुकान बंद थी। यह बहुत अजीब बात थी, क्योंकि रामू काका कभी भी बिना बताए दुकान नहीं छोड़ते थे। रोहित ने आसपास के लोगों से पूछा तो पता चला कि रात में रामू काका को तेज़ बुखार आया था और वह बेहोश हो गए थे। गाँव के डॉक्टर ने उन्हें शहर के अस्पताल भेज दिया था। रोहित बहुत चिंतित हो गया। उसे पता था कि रामू काका अकेले रहते हैं और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उसने सोचा, *"अगर मैं उनकी मदद नहीं करूँगा, तो कौन करेगा?"* #### **मदद का हाथ** उसी दिन स्कूल से लौटकर, रोहित ने अपने दोस्तों—राहुल, प्रिया और अंकित—को रामू काका के बारे में बताया। सभी ने मिलकर तय किया कि वे उनकी मदद करेंगे। रोहित ने अपनी जमा पूँजी से कुछ पैसे निकाले, राहुल ने अपनी बचत की गुल्लक तोड़ी, और प्रिया व अंकित ने अपने-अपने घरों से अनाज व फल इकट्ठा किए। अगले दिन, वे सभी अस्पताल पहुँचे। रामू काका अब भी कमज़ोर थे, लेकिन जब उन्होंने बच्चों को अपने लिए इतना कुछ लाते देखा, तो उनकी आँखें भर आईं। उन्होंने रोहित का हाथ ...