सब्जी वाला

 एक दिन, जब रोहित सुबह सब्ज़ी लेने पहुँचा, तो देखा कि रामू काका की दुकान बंद थी। यह बहुत अजीब बात थी, क्योंकि रामू काका कभी भी बिना बताए दुकान नहीं छोड़ते थे। रोहित ने आसपास के लोगों से पूछा तो पता चला कि रात में रामू काका को तेज़ बुखार आया था और वह बेहोश हो गए थे। गाँव के डॉक्टर ने उन्हें शहर के अस्पताल भेज दिया था।  


रोहित बहुत चिंतित हो गया। उसे पता था कि रामू काका अकेले रहते हैं और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उसने सोचा, *"अगर मैं उनकी मदद नहीं करूँगा, तो कौन करेगा?"*  


#### **मदद का हाथ**  


उसी दिन स्कूल से लौटकर, रोहित ने अपने दोस्तों—राहुल, प्रिया और अंकित—को रामू काका के बारे में बताया। सभी ने मिलकर तय किया कि वे उनकी मदद करेंगे। रोहित ने अपनी जमा पूँजी से कुछ पैसे निकाले, राहुल ने अपनी बचत की गुल्लक तोड़ी, और प्रिया व अंकित ने अपने-अपने घरों से अनाज व फल इकट्ठा किए।  


अगले दिन, वे सभी अस्पताल पहुँचे। रामू काका अब भी कमज़ोर थे, लेकिन जब उन्होंने बच्चों को अपने लिए इतना कुछ लाते देखा, तो उनकी आँखें भर आईं। उन्होंने रोहित का हाथ पकड़कर कहा, *"बेटा, तुमने मेरी चिंता की... तुम सच में अच्छे इंसान हो।"*  


#### **दुकान फिर से खुली!**  


कुछ हफ़्तों बाद, रामू काका ठीक होकर घर लौट आए। गाँव वालों ने मिलकर उनकी दुकान को फिर से सजाया-संवारा। रोहित और उसके दोस्त अब हर रोज़ उनकी दुकान पर जाते, सब्ज़ियाँ खरीदते और उनका हौसला बढ़ाते। रामू काका की मुस्कान एक बार फिर लौट आई थी।  


धीरे-धीरे, रामू काका ने अपनी दुकान को और बेहतर बनाया। अब वहाँ सब्ज़ियों के साथ-साथ कुछ घरेलू सामान भी मिलने लगे। गाँव वालों ने भी उनका और साथ दिया, और उनकी छोटी-सी दुकान अब गाँव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।  


#### **सीख**  


इस घटना ने रोहित को एक बड़ी सीख दी—**"अगर हम मिलकर किसी की मदद करें, तो उसका जीवन बदल सकता है। छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव आते हैं।"**  


रामू काका आज भी अपनी दुकान पर मुस्कुराते हुए मिलते हैं, और रोहित को देखकर कहते हैं—**"आओ बेटा, आज तुम्हारे लिए ताज़ी पालक लाया हूँ!"**  

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